हौसले की उड़ान
पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।।Ó
ये पंक्तियां मलोट निवासी मधु बाला की अभी तक की जिंदगी की केमिस्ट्री से बिल्कुल मेल खाती हैं। उसके माता-पिता को उस पर गर्व है। ताईक्वांडो में अपना सिक्का जमा चुकी मधु पढ़ाई में भी किसी से कम नहीं है। उसने खेलों के साथ-साथ पढ़ाई में भी विशेष प्राप्तियां हासिल करके अपने माता-पिता का नाम रौशन किया है। मधु बाला गुरु नानक गल्र्स कॉलेज मुक्तसर में बीए प्रथम वर्ष की
छात्रा है।
बचपन से ही खेलों में विशेष रूचि रखने वाली मधु ने कोच संदीप सूर्या से प्रशिक्षण लिया और अपने सपनों को पूरा करने में जुट गई। मधु बाला ने वर्ष 2005 में शिमला में आयोजित अंतरराष्ट्रीय स्तर की ताईक्वांडो चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक हासिल किया और उसके बाद उसने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
चंडीगढ़ में आयोजित अंतर कॉलेज ताईक्वांडो चैंपियनशिप में स्वर्ण हासिल करने के बाद उसने खालसाई खेलों में भी लगातार अपनी धाक जमाई और तीन स्वर्ण पदक झटके।
बेटी भी बेटे के बराबर है
मधु बाला के पिता संसारी लाल और माता चंचल रानी कहते हैं कि उन्हें पूरा विश्वास है कि उनकी बेटी आगे चल कर बहुत नाम कमाएगी। इसी कारण उसके लिए उनकी बेटी भी बेटे के बराबर ही है। उनका कहना है कि मधु की बचपन से ही खेल में ज्यादा रूचि रही है।अधिकारों के प्रति सजग हो महिलाएं
॥ भ्रूण हत्या जैसे कलंक को समाप्त करने के लिए महिलाओं को ही आगे आना होगा। क्योंकि जब तक महिला अपने अधिकारों के लिए सजग नहीं होगी। इसी तरह भ्रूण हत्या जारी रहेगी। महिलाओं को अपने हकों के लिए आगे आना होगा। आजकल समाज में जो असुरक्षा की भावना महिलाओं में पनप रही है उसे वे खुद ही दूर कर सकती हैं।
मधु बाला, ताईक्वांडो खिलाड़ी
सपनों में जान, हौसलों से उड़ान
'मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है। पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।।Ó ये...
जतिंदर कुमार त्न मà | Mar 12, 2012, 02:08 AM IST
'मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है।पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।।Ó
ये पंक्तियां मलोट निवासी मधु बाला की अभी तक की जिंदगी की केमिस्ट्री से बिल्कुल मेल खाती हैं। उसके माता-पिता को उस पर गर्व है। ताईक्वांडो में अपना सिक्का जमा चुकी मधु पढ़ाई में भी किसी से कम नहीं है। उसने खेलों के साथ-साथ पढ़ाई में भी विशेष प्राप्तियां हासिल करके अपने माता-पिता का नाम रौशन किया है। मधु बाला गुरु नानक गल्र्स कॉलेज मुक्तसर में बीए प्रथम वर्ष की
छात्रा है।
बचपन से ही खेलों में विशेष रूचि रखने वाली मधु ने कोच संदीप सूर्या से प्रशिक्षण लिया और अपने सपनों को पूरा करने में जुट गई। मधु बाला ने वर्ष 2005 में शिमला में आयोजित अंतरराष्ट्रीय स्तर की ताईक्वांडो चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक हासिल किया और उसके बाद उसने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
चंडीगढ़ में आयोजित अंतर कॉलेज ताईक्वांडो चैंपियनशिप में स्वर्ण हासिल करने के बाद उसने खालसाई खेलों में भी लगातार अपनी धाक जमाई और तीन स्वर्ण पदक झटके।
बेटी भी बेटे के बराबर है
मधु बाला के पिता संसारी लाल और माता चंचल रानी कहते हैं कि उन्हें पूरा विश्वास है कि उनकी बेटी आगे चल कर बहुत नाम कमाएगी। इसी कारण उसके लिए उनकी बेटी भी बेटे के बराबर ही है। उनका कहना है कि मधु की बचपन से ही खेल में ज्यादा रूचि रही है।अधिकारों के प्रति सजग हो महिलाएं
॥ भ्रूण हत्या जैसे कलंक को समाप्त करने के लिए महिलाओं को ही आगे आना होगा। क्योंकि जब तक महिला अपने अधिकारों के लिए सजग नहीं होगी। इसी तरह भ्रूण हत्या जारी रहेगी। महिलाओं को अपने हकों के लिए आगे आना होगा। आजकल समाज में जो असुरक्षा की भावना महिलाओं में पनप रही है उसे वे खुद ही दूर कर सकती हैं।
मधु बाला, ताईक्वांडो खिलाड़ी

Good content
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